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श्रुत पंचमी More..

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बाढ़ पीड़ितों को मदत

असहाय बजुर्गो को मदत

महामारी में काम न मिलने पर जरुरतमंदो को मदत

जय जिनेन्द्र,

श्रुत पंचमी पर्व से हम सब अवगत हैं ही, साथ ही कुन्दकुन्द भगवान के पूर्व भव से भी, कि जिनवाणी सेवा के प्रताप से ही कुंदकुंद जैसे महान आचार्य बन पाए, हमारी समिति पिछले कई वर्षों से जिनवाणी सेवा के कार्य में रत हैं, इसी दौरान हमें देश-विदेश में मौजूद कई सारे प्राचीन/महत्वपूर्ण ग्रंथों की जानकारी भी प्राप्त हुई है, कई सारे देश - इटली, चीन, रूस, जर्मनी, फ़्रांस, विएना और अनगिनत देशों में हमारे प्राचीन शास्त्र उपलब्ध हैं, कई देशों में तो हमारे शास्त्रों पर शोध भी चल रहे हैं लेकिन उनमें से कई ग्रन्थ हमारे देश ही अनुपलब्ध हो चुके हैं | कुछ शास्त्र हम पहले प्रकाशित भी करा चुके हैं | 

हम चाह रहे हैं, देश/विदेश में ऐसे अनुपलब्ध ग्रन्थ हम खोजकर उनको पुनः प्रकाशित करा पाएं, अगर आप भी जिनवाणी सेवा के कार्य में निःस्वार्थ सहयोग देना चाहें तो निम्न जानकारी हमारी समिति को मेल करें या व्हाट्सप्प क्रमांक पर प्रेषित करें | 

 

आपका नाम : 

दूरभाष क्रमांक : 

ईमेल आईडी : 

आपका गाँव/शहर : 

 

और जो लोग ज्यादा समय नहीं दे पाएं, वो कम से कम निम्न कार्य तो कर ही सकते हैं, 

१) अपने परिचित लोगों को एकत्र कर अपने गाँव/शहर के जिनालयों में प्राचीन शास्त्रों को धूप में रखें, वर्ष में कम से कम २-३ बार शास्त्रों को धूप दिखाएँ | 

२) प्राचीन शास्त्रों को लाल कपड़ें में लपेटकर रखें, इससे वो ज्यादा सुरक्षित रहेगें | साथ ही लकड़ी की पेटी में शास्त्र जी रखें | साथ ही पेटी में ऐसी दवा(सूखी नीम) आदि रखें, जिससे कीड़े न हों | 

३) जिन शास्त्रों के पृष्ठ नमी सोख रहे हों, उनके बीच बटर पेपर लगा सकते हैं | 

४) सारे प्राचीन शास्त्रों(जो उपलब्ध न हों) की एक सूची बनायें, और उपयोगी होने पर या तो आप स्वयं प्रकाशित कराएं, अन्यथा हमको सूचित करें, हम प्रकाशन में सहयोग का प्रयास करेगें |  

 

ये कार्य आप नगरों के सारे जिनालयों और अपने आसपास के गाँव/शहरों में अपने मित्रों/रिश्तेदारों को जोड़कर कर सकते हैं | आप इस कार्य के फोटो हमें भेज सकते हैं, हम ये फोटो प्रकाशित करेगें | 

 

* अगर आपके पास प्राचीन ग्रंथो की कुछ उपयोगी जानकारी हो तो हमें सूचित करें |अगर आप हिंदी जानते हों तो कृपया हिंदी में ही मेल करें, हमें आसानी होगी | 

 

जैन संघ पुणे 

This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

8888832198/8806795854

 

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Jay Jinendra,

We are making a team, which can contribute towards conservation of our ancient Manuscript/Shastra, if you also want to be part, please forward us your deatils:

Your Name:

Mobile Number:

Email Id:

Your Place : 

 

You can atleast perform following activities, wont take too much time : 

1) Place Manuscript/Shastra ji in Sunlight. 

2) Wrap them in red cloth and place in wooden box, also keep dry Neem leaf in box. 

3) If there is Moisture problem, you can place butter place between pages. 

4) Make list of shastra, which are not available, if possible you get it printed, else let us know, we will help you to get it published. 

For this you can make a team, having your friends/relatives, you can do this in your nearby places. Send us photo of this work, we will publish it. 

 

***If you are having any important information related to important manuscript/shastra, please let us know.

 

Jain Sangh Pune 

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8888832198/8806795854